А¤а¤ѕа¤°а¤¤аґ‡а¤‚दഃ А¤їаґѓа¤— { Bhartendu Yug } А¤а¤ѕа¤°а¤¤аґ‡а¤‚दഃ А¤їаґѓа¤— А¤•аґђ А¤µа¤їа¤¶аґ‡а¤·а¤¤а¤ѕ || А¤а¤ѕа¤°а¤¤аґ‡а¤‚दഃ А¤їаґѓа¤— А¤•ഇ А¤°а¤ља¤ёа¤ѕа¤•а¤ѕа¤° -
लेखकों ने समाज की कुरीतियों और ब्रिटिश शासन की विसंगतियों पर तीखा व्यंग्य किया। भारतेंदु की 'अंधेर नगरी' इसका बेहतरीन उदाहरण है।
भारतेंदु युग वह सेतु है जिसने हिंदी साहित्य को मध्यकाल की श्रृंगारिकता से निकालकर आधुनिक काल की वास्तविकता और राष्ट्रीयता से मिलाया। इसी युग में हिंदी पत्रकारिता और नाटक जैसी विधाओं का वास्तविक विकास हुआ। मन की लहर
प्रेम पुष्पावली, मन की लहर, हठी हम्मीर मन की लहर
रचनाकार प्रमुख रचनाएँ भारतेंदु हरिश्चंद्र मन की लहर
इस काल में संस्कृत, अंग्रेजी और बांग्ला के प्रसिद्ध ग्रंथों का हिंदी में बड़े स्तर पर अनुवाद हुआ, जिससे हिंदी साहित्य समृद्ध हुआ।
पावस पचासा, सुकवि सतसई, हो हो होरी
साहित्य में केवल राजा-रानियों की कहानियाँ नहीं, बल्कि बाल-विवाह, छुआछूत, सती प्रथा और नारी शिक्षा जैसे सामाजिक मुद्दों पर खुलकर लिखा गया।